जैसे ही अंकेश का शव घर पहुंचा, बैंड बजना शुरू हो गया, पिता ने पगड़ी पहन किया बेटे का स्वागत…

जैसे ही अंकेश का शव घर पहुंचा, बैंड बजना शुरू हो गया, पिता ने पगड़ी पहन किया बेटे का स्वागत…

न्यूज़ एप/घुमारवीं

 

अरूणाचल प्रदेश में हिमस्खलन की चपेट में आने से शहीद हुए बिलासपुर जिले के सेऊ गांव के जवान अंकेश भारद्वाज की पार्थिव देह रविवार सुबह उनके पैतृक गांव पहुंची। जैसे ही पार्थिव देह घर पहुंची बैंड बाज के साथ उनका स्वागत किया गया। पिता ने भी बेटे के स्वागत के लिए पगड़ी पहन ली थी। पिता की इच्छा थी कि जब बेटे का शव घर पहुंचे तो उसका स्वागत बैंड बाजों के साथ किया जाए। अंकेश की पार्थिव देह के घर पहुंचने से पहले ही पूरे घर में राष्ट्रीय ध्वज लगा दिए गए थे और घर को किसी शादी समारेह की तरह सजाया गया था। बड़ी संख्या में लोग घर के बाहर एकत्र थे। घर से ही शहीद के शव को राजकीय सम्मान के साथ मुक्तिधाम ले जाया जाएगा। शहीद के सम्मान में युवाओं ने तरघेल से तिरंगा यात्रा और बाइक रैली भी निकाली। इस दौरान शहीद अंकेश के लिए नारे भी लगाए गए। इस दौरान खाद्य आपूर्ति मंत्री राजिंद्र गर्ग सहित कई चुनिदा प्रतिनिधि शहीद के घर पहुंच गए थे।एसडीएम राजीव ठाकुर, डीएसपी अनिल सहित अन्य अधिकारियों भी शहीद को अंतिम विदाई दी।
देश के लिए बलिदान देने वाले बिलासपुर जिले के सेऊ गांव के जांबाज सैनिक अंकेश भारद्वाज की पार्थिव देह शनिवार को पठानकोट एयरबेस पहुंची गई थी। यहां पर अंकेश को सलामी देने के बाद दोपहर करीब साढ़े 12 बजे घर के लिए रवाना किया गया। पठानकोट से करीब छह घंटे के सफर के बाद अंकेश की पार्थिव देह पैतृक घर पहुंचनी थी, लेकिन रात के समय पार्थिव देह घर न लाने का फैसला लेते हुए पिता ने सुबह लाने की बात कही। अंकेश भारद्वाज के पिता बांचा राम की रात को बेटे को घर ना लाने की मांग पर प्रशासन ने हमीरपुर जिले में भोटा स्थित विश्रामगृह में अंकेश के पार्थिव देह को रखने की व्यवस्था की गई। शहीद अंकेश के पिता का कहना था कि उनके वीर बेटे को दिन के उजाले में घर लाया जाए, रात के समय उनके बेटे को वो वह सम्मान नहीं दे पाएंगे, जिस सम्मान का हकदार उनका बेटा है। अपने लाल को वो घर से बैंडबाजे के साथ दूल्हे के रूप में विदा करेंगे। उनकी इच्छा के अनुसार शहीद की पार्थिव देह सुबह उनके घर पहुंची।

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