राजस्व रिकार्ड में जल्द खश कनैत जाति दुरूस्त नहीं की तो होगा प्रदर्शन
राजस्व रिकार्ड में जल्द खश कनैत जाति दुरूस्त नहीं की तो होगा प्रदर्शन
गिरिपार खश कनैत केंद्रीय समिति ने चेताया…
न्यूज़ एप/पांवटा साहिब
अगर राजस्व रिकार्ड में जल्द ही खश कनैत जाति दुरूस्त नहीं की गई तो राजस्व सचिव के खिलाफ सचिवालय के समक्ष धरना प्रदर्शन किया जाएगा। गिरिपार खश कनैत केंद्रीय समिति अध्यक्ष वेद प्रकाश ठाकुर व मुख्य सलाहकार रणसिंह चौहान ने कहा कि 1955 में बिना किसी मांग के जाति से छेड़छाड़ की गई है जिससे क्षेत्र को लोगों ने नाराजगी व्यक्त की है। गिरिपार में दो पक्ष पाशी(पांडव पक्ष) व शाठी (कौरव पक्ष) के नाम से जाना जाता है। इन सभी के साथ विभिन्न अनूसूचित जातियां रह रही है। इनकी जाति को बिना किसी मांग के ही शजरा नसब( राइट ऑफ रिकॉर्ड) को दूर करने की राजस्व विभाग से मांग रखी
गई है। इसको पूरा नही किया गया तो इसी माह के अंतिम सप्ताह में सचिवालय के समक्ष राजस्व सचिव के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
गिरिपार खश कनैत केंद्रीय समिति अध्यक्ष वेद प्रकाश ठाकुर व मुख्य सलाहकार रणसिंह चौहान ने
प्रेस ब्यान जारी कर ये बात कही।
उन्होंने कहा कि सिरमौर गजेटियर के मुताबिक गिरिपार क्षेत्र में बाहुल्य तौर पर
खश कनैत रहते आ रहे हैं । जो कि वर्ष 1903, 1912 व 1934 के गजेटियर में
भी अंकित है। जिसमें दो पक्ष है। एक पक्ष पाशी(पांडव) तथा दूसरा पक्ष साठी(कौरव) के नाम से जाना जाता है। इन सभी का हाटी विभिन्न अनुसूचित जातियां भी शामिल रही है। स्वतंत्र भारत में 1955 में गिरिपार के हाटी समुदाय के राइट ऑफ रिकॉर्ड यानी शजरा नशा से छेडख़ानी की गई है। यह छेडख़ानी हिमाचल प्रदेश सरकार के एक प्रशासनिक आदेश द्वारा की गई। जबकी गिरिपार क्षेत्र के लोगों द्वारा जाति परिवर्तन के बारे कोई भी आवेदन सरकार के पास नहीं भेजा। केवल तत्कालीन कुछ राजनेताओं ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए राजस्व अभिलेखों में खश कनैत की जगह राजपूत शब्द लिखवाने के आदेश दिए। जो असंवैधानिक और अनुचित है। जिसके बाद से आज तक गिरिपार की जनता अपनी जाति दुरुस्त के लिए दर-दर भटक रही है। उन्होंने कहा कि
वर्तमान में जब केंद्रीय समुदाय द्वारा समिति के माध्यम से मामला सरकार के ध्यान में लाया। सरकार अपनी राय स्पष्ट कर चुकी है कि इसे दुरुस्त किया जाना उचित है। वहीं दूसरी ओर अधिकारीगण इस प्रकरण पर चुप्पी साधे है। इसके बारे में सरकार हिमाचल प्रदेश द्वारा वर्ष 2018 में नोडल प्राधिकरण के माध्यम से
जांच व अध्ययन करवाया। पाया कि वास्तव में इस सत्र में राजपूत जाति नहीं खश,कनैत जाती रहती है। इस आशय की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भी भेजी जा चुकी है। परंतु राजस्व विभाग इस विषय पर विगत तीन माह से खामोश है। उन्होंने कहा कि बार-बार आग्रह करने पर भी राजस्व विभाग खामोश बैठा है। एथनोग्राफी सर्वे रिपोर्ट में इस क्षेत्र निवासियों को खश कनैत माना गया है। राजस्व विभाग के उदासीन रवैए के प्रति हाटी समुदाय में घोर निराशा है। गिरिपार खश कनैत केन्द्रीय समिति अध्यक्ष व मुख्य सलाहकार ने कहा कि शीघ्र जाति को दुरुस्त नहीं किया जाता तो राजस्व सचिव के खिलाफ इसी माह के अंतिम
सप्ताह में सचिवालय के समक्ष धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
