क्यूं निजी अस्पतालों में ईलाज को मजबूर चार विधानसभा क्षेत्रों के लोग

क्यूं निजी अस्पतालों में ईलाज को मजबूर चार विधानसभा क्षेत्रों के लोग

मंहगे दामों पर करवाना पड़ रहा है उपचार….

न्यूज़ एप/पांवटा साहिब

सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में स्टाफ के आभाव से स्थिति दिनप्रतिदिन दयनीय होती जा रही है। अस्पताल में प्रतिदिन 700 से अधिक ओपीडी है लेकिन हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद पिछले एक साल से रिक्त होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में जहां पिछले काफी समस से हड्डी चिकित्सक का पद खाली है इसके साथ साथ स्टाफ नर्सों के भी कई पद खाली पड़े है।

चार विधानसभा सहित दो पड़ोसी राज्य के लोग भी आते है अस्पताल में उपचार करवाने।

सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में दुर्गम क्षेत्र शिलाई, रेणुका जी, पांवटा साहिब, नाहन सहित उत्तराखंड व हरियाणा के लोग भी उपचार करवाने अस्पताल में आते है। जिसमें प्रतिदिन करीब 700 की ओपीडी होती है लेकिन स्टाफ के कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

700 की ओपीडी में सबसे अधिक हड्डी रोगियों की संख्या।

सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में प्रतिदिन 700 की ओपीडी होती है लेकिन पांवटा साहिब में अधिक सड़क हादसों के कारण हड्डी रोगियों की संख्या अधिक रहती है। हड्डी रोग से संबंधित प्रतिदिन 130 से 150 मरीज आते है। लेकिन हड्डी विशेषज्ञ का पद खाली होने से अधिक्तर लोगों को निजी अस्पताल में जाकर मंहगे दामों पर उपचार करवाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

क्या कहते है लोग।

भंगानी पंचायत के लियाकत अल्ली, सतौन के रामेश्वर शर्मा, दलीप शर्मा, कोड़गा के मामराज, रणवीर सिंह, पोका के प्रेम सिंह, नरेश चौहान, कांटी मशवा के सुरेंद्र सिंह, देवेंद्र कुमार आदि ने बताया की पांवटा साहिब सिविल अस्पताल में करीब 700 की ओपीडी रहती है। जिसमें हड्डी रोगियों की अधिक संख्या रहती है। सिविल अस्पताल से करीब एक साल पहलें हड्डी विशेषज्ञ का तबादला हो गया था जिसके बाद से डाक्टर का पद खाली होने से लोगों को निजी अस्पतालों में मंहगे दामों पर उपचार करवाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। लोगों ने सरकार से मांग की है कि सिविल अस्पताल में जल्द ही हड्डी विशेषज्ञ का पद को भरा जाये।

क्या कहते है अस्पताल प्रभारी।

सिविल अस्पताल पांवटा साहिब के प्रभारी संजीव सहगल ने बताया की काफी समय से स्टाफ की कमी चल रही है जिसके बारें में कई बार उच्च अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत करवा चुके है।

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