आदिवासी सा जीवन व्यतीत कर रहा दिव्यांग प्रेम की पुकार सुनकर भी नहीं जगी सरकार..
आदिवासी सा जीवन व्यतीत कर रहा दिव्यांग प्रेम की पुकार सुनकर भी नहीं जगी सरकार..
ऊर्जा मंत्री के गृह क्षेत्र में अंधेरे में जीवन व्यतीत कर रहा है दिव्यांग…
पांवटा साहिब-उपमंडल पांवटा साहिब के राजबन में आदिवासियों सा जीवन जी रहे दरिद्र, बेसहारा, दिव्यांग प्रेम की पुकार की पुकार कोई नहीं सून रहा है। दिव्यांग कई बार सरकार व प्रशासन को अपनी गुहार लगा चुका है लेकिन इस और कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
भले ही पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुखराम चौधरी प्रदेश सरकार में ऊर्जा मंत्री के पद पर आसीन है। लेकिन आज तक ऊर्जा मंत्री का भी दिव्यांग व्यक्ति के और कोई ध्यान नहीं गया।
बता दें कि बेशक सरकार ने गरीब लोगों के उत्थान के लिये कई योजनाएं चलाई हुई है। लेकिन पांवटा साहिब के राजबन के वृद्ध दिव्यांग प्रेम के लिए ना जाने यह योजनाएं कहां गुम हो गई है।
दिव्यांग व्यक्ति के खंडहर नुमा कमरे में खिड़की, दरवाजे बिजली व पानी कनेक्शन भी नहीं है। जिस कारण दिव्यांग वृद्ध नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। लेकिन आज तक इस और सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों तथा नेताओ की नजर भी नहीं पड़ी है।
आस पास के लोगों के अनुसार विकास खंड पांवटा साहिब के मुगलांवाला करतारपुर पंचायत के राजबन में 55 वर्षीय दिव्यांग प्रेम चंद अमानवीय दशा में जीवन व्यतीत कर रहा है। प्रेम चंद ने बताया की वह बचपन से दिव्यांग है और चल फिर भी नहीं सकता।
प्रेम चंद के पास जमीन भी नहीं है तथा 30 साल पहले गांव के ही एक व्यक्ति ने एक कमरे बनाने के लिये जमीन दान में दी थी। जिसके बाद पंचायत ने दिव्यांग व्यक्ति को बीपीएल सूची में डाला तथा 2003 में 27 हजार रूपये से एक कमरा बनाया। लेकिन उसमें ना तो पलस्तर किया ना ही उसमें खिड़की दरवाजे लगाये गये।
प्रेम चंद ने बताया की 2004 में पत्नी की बीमारी के कारण निधन हो गया था। एक बेटी थी। उसकी भी चार साल पहले शादी हो गई है। बेटी भी निर्धन होने के कारण सहायता नहीं कर पा रही है।
सरकार ने करीब लोगों के लिये नि:शुल्क बिजली कनेक्शन, गैस कनेक्शन आदि को योजनाएं चलाई थी लेकिन आज तक प्रेम चंद को बिजली तक का कनेक्शन नहीं मिला। जिस कारण अंधेरे में ही रहना पड़ रहा है। गैस कनेक्शन भी ना होने के कारण लकडिय़ों से खाना बनाना पड़ता है।
घर में पानी का कनेक्शन भी नहीं है जिस कारण व्यक्ति को पानी दूर से लाना पड़ता है। कमरे में पलस्तर ना होने के कारण अब एक कमरा भी खंडहरनुमा हो गया है। प्रेम चंद का कहना है की सरकार की तरफ से पैंशन मिलती है लेकिन उससे दवाइयों का गुजारा भी पुरा नहीं होता। अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई सहायता नहीं मिली है।
