जनजातीय क्षेत्र घोषित होने से किसी का आरक्षण समाप्त नहीं होगा न ही एट्रोसिटी एक्ट खत्म होगा, खुमली में बोले केंद्रीय हाटी समिति के महासचिव कुंदन सिंह शास्त्री…

जनजातीय क्षेत्र घोषित होने से किसी का आरक्षण समाप्त नहीं होगा न ही एट्रोसिटी एक्ट खत्म होगा, खुमली में बोले केंद्रीय हाटी समिति के महासचिव कुंदन सिंह शास्त्री…

न्यूज़ एप/पांवटा साहिब

गिरिपार क्षेत्र के जाखना में हाटी खुमली आयोजित की गई जिसमें केंद्रीय हाटी समिति के महासचिव कुंदन सिंह शास्त्री, खश कनैत समिति गिरिपार के मुख्य सलाहकार रण सिंह चौहान, कर्नल नरेश चौहान विशेष रूप से शामिल हुए।इस खुमली में मस्तभोज क्षेत्र की सभी पंचायतों के प्रतिनिधि और बुद्धिजीवी लोग उपस्थित रहे।
सबसे पहले कर्नल नरेश चौहान ने हाटी जनसमुदाय के इतिहास,आंदोलन की पृष्ठभूमि,संवैधानिक उपबन्धों पर विस्तार से प्रकाश डाला।उसके बाद महासचिव कुंदन सिंह शास्त्री द्वारा हाटी जनसमुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलवाने के लिए किए गए संघर्ष और प्रगति के विषय में विस्तृत चर्चा की।उन्होंने बताया कि इस संघर्ष में वर्षों से बहुत सारे बुद्धिजीवियों ने अपने तन मन धन की आहुति दी।साथ ही गिरिपार क्षेत्र का इतिहास समृद्ध संस्कृति और सामंजस्य का रहा है।इसलिए सभी वर्गों के लोगों को इसमें आपसी तालमेल के साथ सहयोग करना चाहिए।
अपने हितों को लेकर चिंतित रहने वाले कुछ विशेष वर्गों के लोगों से भी समिति की ओर से आह्वान किया गया कि अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने के बाद अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा।किसी का आरक्षण समाप्त नहीं होगा न ही एट्रोसिटी एक्ट ही खत्म होगा।
खश कनैत समिति गिरिपार के मुख्य सलाहकार रण सिंह चौहान ने आने वाले समय में गिरिपार क्षेत्र में रहने वाले खशों और भाटों को 1955 में शजरा नस्ल के अंदर राजपूत और ब्राह्मण के रूप में दर्ज किए जाने के कारण आने वाली विसंगतियों और समस्याओं को दूर करने का प्रयास करना होगा।उन्होंने 1903 से लेकर 1955 तक गजेटियर के आधार पर पुष्ट जानकारी सांझा की।
इस अवसर पर खुली चर्चा का सत्र भी आयोजित किया गया जिसमें शंकाओं का समाधान किया गया। हाटी खुमली में मस्तभोज क्षेत्र की सभी पंचायतों के प्रधान, उप प्रधान,पंचायत सदस्यों तथा दर्जनों बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।

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