पांवटा साहिब के सिविल अस्पताल में डायलिसिस सेंटर में मरीज का नहीं किया डायलिसिस,परिजनों को उत्तराखंड के निजी अस्पताल में महंगे दामों पर मरीज का करवाना पड़ा डायलिसिस….
पांवटा साहिब के सिविल अस्पताल में डायलिसिस सेंटर में मरीज का नहीं किया डायलिसिस,परिजनों को उत्तराखंड के निजी अस्पताल में महंगे दामों पर मरीज का करवाना पड़ा डायलिसिस….
परिजनों ने डायलिसिस सेंटर संचालक के खिलाफ की कार्रवाई की मांग…
न्यूज़ एप/पांवटा साहिब
उपमंडल पांवटा साहिब के सिविल अस्पताल में डायलिसिस सेंटर में एक व्यक्ति का डायलिसिस ना करने का मामला सामने आया है। जिस कारण परिजनों को मजबूरन उत्तराखंड के एक निजी अस्पताल में महंगे दामों पर उनका डायलिसिस करवाने को मजबूर होना पड़ा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पांवटा साहिब के छछेती पंचायत के जसमेर सिंह पुत्र प्रीतम सिंह किडनी के रोग से पीड़ित है। जिनका पिछले एक साल से पांवटा साहिब के सिविल अस्पताल में स्थित राही केयर डायलिसिस सेंटर से डायलिसिस का उपचार चला हुआ है। लेकिन शनिवार को जब परिजन प्रीतम सिंह को सिविल अस्पताल के डायलिसिस सेंटर में डायलिसिस करवाने के लिए लाए तो वहां पर चिकित्सकों ने उनका डायलिसिस करने से इंकार कर दिया। जिसके बाद आनन-फानन में परिजनों को उत्तराखंड के एक निजी अस्पताल में जाकर महंगे दामों पर उनका डायलिसिस करवाना पड़ा। छछेती पंचायत के पूर्व प्रधान प्रेमपाल ठाकुर ने बताया कि जसमेर सिंह का काफी समय से किडनी के रोग का उपचार चला हुआ है। लेकिन सिविल अस्पताल में स्थित डायलिसिस सेंटर के संचालकों ने डायलिसिस करने से इंकार कर दिया। उन्होंने बताया कि उनका सरकार द्वारा बनाया गया हिम केयर कार्ड भी वहां से बंद नहीं किया। जिस कारण निजी अस्पताल में निजी खर्चे से डायलिसिस करवाना पड़ा।पूर्व प्रधान ने मांग की है कि अगर सिविल अस्पताल में स्थित डायलिसिस सेंटर वाले अपनी मनमर्जी करते रहेंगे तो आम गरीब लोग ऐसे ही परेशान होते रहेंगे। इसलिए इसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
उधर पांवटा साहिब के सिविल अस्पताल में स्थित राही केयर डायलिसिस सेंटर के मैनेजर विशाल ने बताया कि जसमेर सिंह की किडनी 40% ही काम कर रही है। जिस कारण उनका यहां पर डायलिसिस नहीं हो सकता था तथा चिकित्सकों उन्हें हायर सेंटर के लिए रेफर किया गया।
