राजस्व रिकार्ड में जल्द ही राजपूत की जगह खश कनेत जाती दर्ज नहीं हुई तो होगा अधिकारियों का घेराव…

राजस्व रिकार्ड में जल्द ही राजपूत की जगह खश कनेत जाती दर्ज नहीं हुई तो होगा अधिकारियों का घेराव…

राजस्व अधिकारी यह मामला जानबूझकर लंबित किया जा रहा है,2 मार्च से होगा सांकेतिक धरना:रणसिंह चौहान..

न्यूज़ एप/पांवटा साहिब

प्रशासन ने अगर जल्द ही राजस्व रिकार्ड में राजपूत की जगह खश कनेत जाती दर्ज नहीं किया तो राजस्व अधिकारियों का घेराव कर 2 मार्च को सांकेतिक धरना किया जायेगा। जिसके लिए प्रशासन जिम्मेवार होगा।
खश कनेत गिरिपार विधि के सलाहकार रण सिंह चौहान ने बताया कि गिरिपार क्षेत्र जो जातियां रह रही हैं उनको 1912 के रिकॉर्ड अनुसार जैसा कि कुंवर रणजोत सिंह तत्कालीन न्यायाधीश सिरमौर द्वारा अपनी बुक में लिखा गया की गिरिपार क्षेत्र में अधिकांश लोग खश कनेत है जो आदिकाल से वहां रह रहे हैं। रण सिंह चौहान ने कहा की खश कनेत गिरिपार समिति द्वारा विगत 1 वर्ष पूर्व सचिव राजस्व हिमाचल प्रदेश के माध्यम से राजस्व विभाग के अभिलेखों में अनुचित तरीके से 1955 से इन जातियों को राजपूत लिखा गया। जोकि सही नहीं है इसी परिपेक्ष में 1934 में तत्कालीन आयुक्त कहानचंद कपूर द्वारा सिरमौर गजट ईयर में लिखा था गिरिपार की जातियां खश कनेत है। जोकि एक आधिकारिक दस्तावेज है इसके अतिरिक्त तत्कालीन उपायुक्त सिरमौर ने वर्ष 1996 में एक सर्वे करवाया गया जिसमें माना गया कि ट्रांस गिरी में खश कनेत जाति के लोग रहते हैं यह सर्वे रिपोर्ट तत्कालीन निदेशक कल्याण एवं समाजिक अधिकारिता विभाग हिमाचल प्रदेश को भेजी गई थी इसके अतिरिक्त यहां यह भी उल्लेख करना चाहूंगा कि अक्टूबर 2021 को माननीय प्रधानमंत्री को भेजी गई रिपोर्ट में भी सरकार हिमाचल प्रदेश द्वारा उक्त जाति का उल्लेख किया गया है। माननीय सचिव एवं वित्त आयुक्त हिमाचल प्रदेश ओंकार शर्मा द्वारा उपायुक्त सिरमौर से तत्काल रिपोर्ट करने को कहा गया था परंतु काफी समय व्यतीत होने के बावजूद भी अभी तक उपायुक्त सिरमौर रिपोर्ट भेजने में विफल रहे हैं सभी साक्ष्य इस तथ्य को पुख्ता करते हैं की 1955 में अनुचित तरीके से जातियों में बदलाव किया गया है। जिसे अभिलेखों में दुरुस्त किया जाना अति आवश्यक ही नहीं अपितु न्याय संगत होगा। उपायुक्त सिरमौर और समस्त राजस्व अधिकारी जिला सिरमौर को माननीय राजस्व मंत्री हिमाचल प्रदेश महेंद्र सिंह द्वारा 14 दिन के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था परंतु सिरमौर में राजस्व अधिकारियों की उदासीनता के कारण यह मामला जानबूझकर लंबित किया जा रहा है।
इस बाबत उक्त समिति सिरमौर प्रशासन को आगाह करना चाहती है कि यदि तुरंत निराकरण नहीं किया गया तो 2 मार्च से सांकेतिक धरना के साथ आगामी रणनीति के तहत राजस्व अधिकारियों का घेराव किया जाएगा साथ ही यह भी स्पष्ट करना चाहेंगे कि इस आंदोलन के लिए सीधे-सीधे उपायुक्त सिरमौर जिम्मेदार होंगे।

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